
पुतिन की भारत यात्रा 2025 का विश्लेषण: भारत–रूस संबंध(India-Russia Relation), अमेरिका और चीन पर प्रभाव
इंडो–रूसवार्षिकशिखरसम्मेलन(2025) औरराष्ट्रपतिपुतिनकीभारतयात्रा
1. पृष्ठभूमि(Background)-India-Russia Relation
- भारत और रूस के बीच 2000 से “Special and Privileged Strategic Partnership” है।
- दोनों देशों के बीच सबसे उच्च स्तर का संवाद मंच वार्षिक शिखर सम्मेलन है जिसमें प्रधानमंत्री और रूसी राष्ट्रपति आमने-सामने चर्चा करते हैं।
- 2022 के यूक्रेन–युद्ध और अमेरिका–यूरोप की रूस पर कड़ी पाबंदियों के बावजूद भारत ने रूस से संबंध बनाए रखे।
- भारत की रूस से तेल आपूर्ति, रक्षा खरीद, परमाणु ऊर्जा, और उर्वरक साझेदारी पिछले वर्षों में और बढ़ी है।
- 2025 में नई दिल्ली में हुआ 23वाँ वार्षिक शिखर सम्मेलन खास इसलिए था क्योंकि:
- पुतिन पहली बार कई वर्षों बाद भारत आए।
- वैश्विक राजनीति में तनाव, यूक्रेन युद्ध और अमेरिका–रूस मतभेदों के बीच यह यात्रा हुई।
2. प्रमुख परिणाम (Major Outcomes)
(a) राजनीतिक और रणनीतिक संदेश
- भारत ने पुतिन को पूर्ण राज्य अतिथि (State Guest) सम्मान दिया — यह संकेत कि रूस भारत की विदेश नीति में अब भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- दोनों नेताओं ने संबंधों को “स्थिर, भरोसेमंद और बहु-आयामी” बताया।
(b) व्यापार और अर्थव्यवस्था
- लक्ष्य: 2030 तक 100 बिलियन डॉलर व्यापार।
- उर्वरक, पेट्रोकेमिकल, कृषि, फार्मा, चिकित्सा अनुसंधान और शिक्षा क्षेत्र में कई समझौते।
- रूस–भारत Eurasian Economic Union (EAEU) के साथ संभावित FTA पर आगे बढ़ने पर सहमत।
(c) ऊर्जा व परमाणु सहयोग
- रूस ने भारत को “अविरल तेल आपूर्ति” (Uninterrupted supply) का वादा किया।
- कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना में अगले चरणों पर सहमति।
- छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMRs) जैसे नए प्रोजेक्ट पर भी बातचीत।
(d) रक्षा सहयोग
- लगभग 16 समझौते, जिनमें रक्षा और सैन्य-तकनीकी सहयोग शामिल।
- रूस ने Su-57 जैसे उन्नत फाइटर जेट के संयुक्त उत्पादन/स्थानीयकरण में रुचि दिखाई।
- आतंकवाद पर कड़ा बयान और संयुक्त सैन्य अभ्यासों को मजबूत करने पर सहमति।
(e) कनेक्टिविटी व लोगों के आदान–प्रदान
- कुशल भारतीय कर्मियों के रूस में रोजगार हेतु Mobility Agreement।
- चन्नई–व्लादिवोस्तोक समुद्री मार्ग और INSTC को आगे बढ़ाने पर जोर।
- रूस को नि:शुल्क 30-दिवसीय e-tourist visa सुविधा।

3. विश्व राजनीति पर प्रभाव (Implications for World Politics)
(a) रूस को अलग–थलग करने की पश्चिमी नीति की सीमाएँ उजागर
- पुतिन की भारत यात्रा ने दिखाया कि रूस को पूरी तरह अलग-थलग करना संभव नहीं है।
- भारत जैसे बड़े विकासशील देशों की रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) मजबूती से सामने आई।
(b) ऊर्जा भू–राजनीति में बदलाव
- यूरोप के बजाय एशिया—विशेषकर भारत और चीन—रूस के तेल के बड़े खरीदार बने।
- इससे वैश्विक तेल प्रवाह (Global Oil Flows) में संरचनात्मक बदलाव हो रहा है।
(c) बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था (Multipolar World)
- BRICS, SCO, और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार पर भारत–रूस के जोर से पश्चिम-प्रधान वैश्विक व्यवस्था को चुनौती मिलती है।
- दोनों देशों ने UN, IMF, विश्व बैंक में सुधार की आवश्यकता को दोहराया।
(d) रक्षा–तकनीक की राजनीति
- यदि भारत–रूस उन्नत प्रणालियों का संयुक्त उत्पादन करते हैं, तो यह अमेरिका, फ्रांस और यूरोप के हथियार आपूर्तिकर्ताओं के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ाता है।
4. भारत–अमेरिका संबंधों पर प्रभाव (Impact on India–USA Relations)
तनाव वाले क्षेत्र
- रूस से तेल खरीद: अमेरिका लंबे समय से भारत पर दबाव डाल रहा था कि वह रूस से खरीद कम करे।
- रक्षा साझेदारी: Su-57 जैसी परियोजनाएँ अमेरिका की उस नीति के विपरीत हैं जिसमें वह भारत की रूसी निर्भरता कम करना चाहता है।
- यूक्रेन युद्ध पर भारत का तटस्थ रुख भी वाशिंगटन में चिंता का कारण।
फिर भी सहयोग जारी क्यों है?
- अमेरिका भारत को चीन–निरोधक रणनीति के केंद्र में देखता है।
- इंडो-पैसिफिक में QUAD और समुद्री सुरक्षा में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण है।
- अमेरिका–भारत के बीच प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर, AI, रक्षा निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है।
निष्कर्ष:
- यात्रा से कुछ तनाव बढ़े, लेकिन साझेदारी का मूल ढाँचा नहीं बदला।
- भारत संतुलित नीति रखते हुए दोनों—अमेरिका व रूस—से रिश्ते निभा रहा है।
5. भारत–चीन संबंधों पर प्रभाव (Impact on India–China Relations)
(a) रूस का भारत–चीन के बीच संतुलन
- रूस चीन के साथ “no limits partnership” रखता है, लेकिन भारत के साथ भी मजबूत संबंध बनाए रखकर एक संतुलन बनाता है।
- यह भारत के लिए सकारात्मक है क्योंकि रूस पूरी तरह चीन की तरफ झुक न जाए, यह भारत के दीर्घकालिक हित में है।
(b) सीमाई विवाद पर सीधे असर नहीं
- यह शिखर सम्मेलन भारत–चीन LAC विवाद को सीधे प्रभावित नहीं करता।
- सीमा पर तनाव, सैन्य तैनाती, और चीन की आक्रामकता जैसे मुद्दे भारत–चीन के द्विपक्षीय दायरे में ही सुलझेंगे।
(c) चीन की दृष्टि
- चीन भारत–रूस निकटता को “स्वाभाविक” मानेगा, लेकिन यह भी समझेगा कि भारत अमेरिका के शिविर में पूरी तरह नहीं गया।
- इससे क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन में भारत की स्वायत्तता और मजबूत होती है।
समग्र निष्कर्ष (Overall Summary)
- पुतिन की भारत यात्रा ने दिखाया कि भारत–रूस संबंध अभी भी जीवंत, रणनीतिक और बहु–क्षेत्रीय हैं।
- यह यात्रा वैश्विक शक्ति-संतुलन में भारत की स्वतंत्र विदेश नीति का प्रमुख उदाहरण बन गई।
- इससे भारत–अमेरिका संबंधों में कुछ तनाव बढ़ा, लेकिन रणनीतिक सहयोग जारी रहेगा।
- भारत–चीन संबंधों में कोई बड़ा परिवर्तन नहीं, पर भारत को रूस के माध्यम से थोड़ी कूटनीतिक बढ़त मिलती है।

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