Pandemic Preparedness in India: Lessons from COVID-19 and Policy Reforms

भारत की महामारी तैयारी और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली समझें—रोग निगरानी, अवसंरचना, शासन, वित्तपोषण और भविष्य की रणनीति। Competitive Examination

महामारी तैयारी एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य– भारत -Pandemic Preparedness

परिचय

महामारी ऐसी संक्रामक बीमारियों का व्यापक प्रसार है जो राष्ट्रीय सीमाओं से परे जाकर समाज, अर्थव्यवस्था और शासन को प्रभावित करती हैं। COVID-19 ने भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की ताकतों और कमियों—दोनों को उजागर किया। भारत जैसे विशाल और विविध देश के लिए महामारी तैयारी केवल स्वास्थ्य का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और सामाजिक न्याय से भी जुड़ा है।

I. महामारी तैयारी का अर्थ(Pandemic Preparedness)

महामारी तैयारी से तात्पर्य किसी देश की वह क्षमता है जिससे वह रोक थाम(Prevention), शीघ्र पहचान(Detection), प्रभावी प्रतिक्रिया(Response) और पुनर्प्राप्ति(Recovery) कर सके। इसके प्रमुख घटक हैं—

  • मजबूत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली
  • रोग निगरानी एवं प्रारंभिक चेतावनी
  • स्वास्थ्य अवसंरचना व मानव संसाधन
  • सुशासन, समन्वय और जोखिम संचार

II. भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था: ढांचा

1. संवैधानिक व प्रशासनिक व्यवस्था

  • सार्वजनिक स्वास्थ्य राज्य सूची का विषय है।
  • केंद्र सरकार नीति-निर्माण, वित्तीय सहायता, राष्ट्रीय निगरानी और अंतर-राज्य समन्वय में भूमिका निभाती है।
  • महामारी में सहकारी संघवाद अत्यंत आवश्यक होता है।

2. स्वास्थ्य सेवा वितरण

  • प्राथमिक स्तर: उप-केंद्र, PHC
  • द्वितीयक स्तर: CHC, जिला अस्पताल
  • तृतीयक स्तर: मेडिकल कॉलेज, AIIMS
    👉 महामारी तैयारी में प्राथमिक स्वास्थ्य पहली पंक्ति की रक्षा है।

III. COVID-19 से मिले प्रमुख सबक

ताकतें

  • परीक्षण व प्रयोगशाला क्षमता का तेज़ विस्तार
  • विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म (CoWIN, Aarogya Setu)
  • स्वदेशी वैक्सीन उत्पादन और दवा आपूर्ति क्षमता

कमियाँ

  • अस्पतालों पर अत्यधिक दबाव (ऑक्सीजन, ICU, स्टाफ)
  • शहरी–ग्रामीण व अंतर-राज्य असमानताएँ
  • कम सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय (~GDP का ~2%)
  • स्थानीय स्तर पर कमजोर रोग निगरानी
  • जोखिम संचार व गलत सूचना की चुनौती

UPSC संकेत: महामारी ने सार्वजनिक स्वास्थ्य को शासन और आपदा प्रबंधन के केंद्र में ला दिया।

IV. भारत में महामारी तैयारी के प्रमुख घटक

1. रोग निगरानी एवं प्रारंभिक चेतावनी

  • एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP)
  • आवश्यकता: रियल-टाइम डेटा, जीनोमिक निगरानी, AI-आधारित पूर्वानुमान

2. स्वास्थ्य अवसंरचना व मानवसंसाधन

  • अस्पताल, प्रयोगशालाएँ, ऑक्सीजन, दवाएँ
  • डॉक्टर, नर्स, ASHA/ANM
  • आपात स्थितियों में Surge Capacity

3. सार्वजनिक स्वास्थ्य वित्तपोषण

  • निवारक स्वास्थ्य, अनुसंधान, आपात तैयारी में निवेश
  • कम व्यय से प्रणाली की लचीलापन घटती है

4. शासन एवं समन्वय

  • मंत्रालयों के बीच तालमेल (स्वास्थ्य, गृह, परिवहन, IT)
  • केंद्र–राज्य समन्वय
  • कानूनी तैयारी (महामारी/आपदा कानून)

5. समुदाय सहभागिता एवं जोखिम संचार

  • जन-विश्वास, व्यवहार परिवर्तन
  • वैक्सीनेशन स्वीकार्यता
  • गलत सूचना का प्रभावी मुकाबला
    👉 महामारी सामाजिक संकट भी होती है।

V. प्रमुख सरकारी पहलें

  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM): प्राथमिक स्वास्थ्य सुदृढ़ीकरण
  • आयुष्मान भारत:
    • HWCs – निवारक/प्रवर्द्धक देखभाल
    • PM-JAY – वित्तीय सुरक्षा
  • राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC): निगरानी व प्रतिक्रिया
  • आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM): डिजिटल स्वास्थ्य ढांचा
  • आपदा प्रबंधन ढांचा: महामारी को जैविक आपदा के रूप में एकीकृत दृष्टि

VI. वैश्विक एवं बहुपक्षीय आयाम

  • अंतरराष्ट्रीय सहयोग, सूचना-साझाकरण
  • वैक्सीन कूटनीति, आपूर्ति शृंखला
  • वैश्विक महामारी संधि व समान पहुँच का समर्थन
    UPSC कोण: स्वास्थ्य सुरक्षा एक वैश्विक सार्वजनिक वस्तु है।

VII. प्रमुख चुनौतियाँ

  1. अपर्याप्त सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय
  2. शहरी पक्षपात
  3. खंडित निगरानी प्रणालियाँ
  4. मानव संसाधन की कमी
  5. अनुसंधान–नीति का कमजोर जुड़ाव
  6. असमानताओं से प्रभावित कमजोर वर्ग (प्रवासी, वृद्ध, गरीब)

VIII. आगे की राह(उत्तर-तैयारबिंदु)

  1. स्वास्थ्य व्यय GDP का 2.5–3%
  2. प्राथमिक स्वास्थ्य व HWCs को मज़बूत करना
  3. One Health दृष्टिकोण (मानव-पशु-पर्यावरण)
  4. जीनोमिक व डिजिटल निगरानी का विस्तार
  5. ऑक्सीजन/ICU/लॉजिस्टिक्स की Surge Capacity
  6. स्वास्थ्यकर्मियों का प्रशिक्षण व सुरक्षा
  7. केंद्र–राज्य समन्वय सुदृढ़
  8. पारदर्शी जोखिम संचार
  9. R&D और स्वदेशी विनिर्माण में निवेश

निष्कर्ष

महामारी तैयारी (Pandemic Preparedness ) एक प्रतिक्रियात्मक उपाय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय लचीलापन का मूल स्तंभ है। भारत के लिए मज़बूत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली, निवारण में निवेश और समान पहुँच सुनिश्चित करना जीवन, आजीविका और दीर्घकालिक विकास की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। एक सुदृढ़ स्वास्थ्य प्रणाली ही सुदृढ़ राष्ट्र की नींव है।

UPSC

Leave a Comment