
Russia Ukraine War 2022–2025: Timeline, Causes, and Future Scenarios in Hindi
Russia Ukraine War 2022–2025
रूस–यूक्रेन युद्ध: पृष्ठभूमि, कारण और वर्तमान स्थिति
1. परिचय
रूस–यूक्रेन युद्ध 21वीं सदी के सबसे महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक संघर्षों में से एक है। इस युद्ध ने वैश्विक राजनीति, सुरक्षा व्यवस्था, ऊर्जा बाजारों और अंतरराष्ट्रीय कानून को गहराई से प्रभावित किया है।
24 फ़रवरी 2022 को रूस द्वारा यूक्रेन पर पूर्ण सैन्य आक्रमण के साथ यह संघर्ष शुरू हुआ, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूरोप का सबसे बड़ा सैन्य टकराव माना जाता है।
2. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
(क) ऐतिहासिक संबंध
- यूक्रेन और रूस के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक संबंध कीवन रूस (9वीं–13वीं शताब्दी) से जुड़े हैं।
- यूक्रेन लंबे समय तक रूसी साम्राज्य और बाद में सोवियत संघ का हिस्सा रहा।
- 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद यूक्रेन एक स्वतंत्र राष्ट्र बना।
(ख) सोवियत काल के बाद के तनाव
- स्वतंत्रता के बाद यूक्रेन ने यूरोप और नाटो (NATO) के साथ घनिष्ठ संबंध बनाने शुरू किए।
- रूस ने इसे अपनी सुरक्षा और प्रभाव क्षेत्र के लिए खतरा माना।
- नाटो के पूर्व की ओर विस्तार को रूस ने बार-बार अपने राष्ट्रीय हितों के विरुद्ध बताया।
3. युद्ध के तात्कालिक कारण
(क) नाटो का विस्तार
- यूक्रेन की नाटो सदस्यता की आकांक्षा ने रूस को चिंतित किया।
- रूस ने मांग की कि यूक्रेन को कभी नाटो में शामिल न किया जाए, जिसे पश्चिमी देशों ने अस्वीकार कर दिया।
(ख) 2014 संकट: क्रीमिया और डोनबास
- 2014 में यूरोपीय समर्थक ‘मैदान आंदोलन’ के बाद रूस ने क्रीमिया पर कब्जा कर लिया।
- डोनेत्स्क और लुहान्स्क (डोनबास क्षेत्र) में रूस समर्थित विद्रोह शुरू हुए।
- 2014–2021 के बीच लगभग 14,000 लोग मारे गए, हालांकि ‘मिन्स्क समझौते’ हुए।
(ग) तत्काल कारण (2022)
- रूस ने आरोप लगाया कि यूक्रेन रूसी भाषी नागरिकों को निशाना बना रहा है और नाटो सैन्य ढांचा बढ़ा रहा है।
- 24 फरवरी 2022 को रूस ने “विशेष सैन्य अभियान” के नाम पर यूक्रेन पर आक्रमण कर दिया।
4. युद्ध में शामिल पक्ष
प्रत्यक्ष पक्ष
- रूस: राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के नेतृत्व में, नाटो विस्तार रोकने और क्षेत्रीय प्रभाव बनाए रखने का प्रयास।
- यूक्रेन: राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेन्स्की के नेतृत्व में, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा।
अप्रत्यक्ष/समर्थक पक्ष
- नाटो व पश्चिमी देश (अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ आदि): सैन्य सहायता, खुफिया सहयोग और रूस पर प्रतिबंध।
- बेलारूस: रूस को सैन्य व लॉजिस्टिक समर्थन।
- चीन, भारत और वैश्विक दक्षिण: औपचारिक रूप से तटस्थ, लेकिन कूटनीतिक व आर्थिक रूप से सक्रिय।
5. वर्तमान स्थिति (2024–2025)
- युद्ध एक लंबे और तीव्र संघर्ष में बदल चुका है।
- यूक्रेन ने कुछ क्षेत्र वापस लिए हैं, लेकिन उसे जनशक्ति और हथियारों की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
- रूस पूर्वी और दक्षिणी यूक्रेन के बड़े हिस्सों पर नियंत्रण बनाए हुए है।
- भारी जनहानि, बुनियादी ढांचे का विनाश और शरणार्थी संकट जारी है।
- पश्चिमी देशों की सहायता जारी है, परंतु राजनीतिक थकान और संसाधनों की कमी दिखने लगी है।
- रूस ने चीन, ईरान और उत्तर कोरिया के साथ सहयोग मजबूत किया है।
6. वैश्विक प्रभाव
(क) आर्थिक प्रभाव
- ऊर्जा, खाद्य और उर्वरक आपूर्ति में भारी व्यवधान।
- विकासशील देशों पर महंगाई का गंभीर प्रभाव।
(ख) भू-राजनीतिक प्रभाव
- नाटो का पुनर्जीवन और यूरोप में रक्षा खर्च में वृद्धि।
- फ़िनलैंड और स्वीडन का नाटो में शामिल होना।
- वैश्विक राजनीति में पश्चिम बनाम रूस-चीन ध्रुवीकरण।
(ग) मानवीय संकट
- लाखों लोग विस्थापित।
- युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में गंभीर मानवीय संकट।
7. संभावित भविष्य परिदृश्य
(क) लंबा गतिरोध
- सबसे संभावित स्थिति; निर्णायक जीत के बिना युद्ध जारी रहेगा।
- भारी आर्थिक और मानवीय लागत।
(ख) वार्ता द्वारा समाधान
- अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता से युद्धविराम संभव, पर दोनों पक्षों के लिए राजनीतिक रूप से कठिन।
(ग) संघर्ष का विस्तार
- नाटो–रूस के सीधे टकराव का जोखिम बना हुआ है।
(घ) ‘फ्रोजन कॉन्फ्लिक्ट’
- कोरिया या डोनबास जैसी स्थिति, जहाँ संघर्ष बिना समाधान के जमे रहता है।
एक-पृष्ठीय रिवीजन नोट (Quick Revision Sheet)
रूस–यूक्रेन युद्ध: त्वरित तथ्य
🔹 शुरुआत:
24 फरवरी 2022 – रूस द्वारा पूर्ण पैमाने पर आक्रमण
🔹 मुख्य कारण:
- नाटो का पूर्व की ओर विस्तार
- यूक्रेन की पश्चिम समर्थक नीति
- 2014 क्रीमिया विलय व डोनबास संघर्ष
🔹 प्रमुख पक्ष:
- रूस बनाम यूक्रेन
- पश्चिमी समर्थन: USA, NATO, EU
- तटस्थ/संतुलनकारी: भारत, चीन, वैश्विक दक्षिण
🔹 वर्तमान स्थिति:
- लंबा युद्ध, सीमित प्रगति
- भारी जनहानि और विस्थापन
- रूस का पूर्वी यूक्रेन पर नियंत्रण
- पश्चिमी देशों की सहायता जारी
🔹 वैश्विक प्रभाव:
- ऊर्जा व खाद्य संकट
- नाटो का विस्तार (फिनलैंड, स्वीडन)
- वैश्विक ध्रुवीकरण
🔹 संभावित भविष्य:
- लम्बा गतिरोध
- सीमित शांति समझौता
- फ्रोजन कॉन्फ्लिक्ट मॉडल
8. निष्कर्ष
रूस–यूक्रेन युद्ध केवल एक क्षेत्रीय संघर्ष नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन, अंतरराष्ट्रीय कानून और विश्व व्यवस्था के भविष्य को आकार देने वाला संकट है। इसका परिणाम आने वाले दशकों तक वैश्विक राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित करेगा।
Russia Ukraine War in English has been posted in earlier post and next post is on Impact on India

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