“G20 Summit 2025: A Historic Gathering on African Soil” a New Chapter for the Continent in Hindi

G20 summit 2025

“G20 Summit 2025: A Historic Gathering on African Soil” a New Chapter for the African Continent in Hindi relevent for Competitive Exams

G20 Summit 2025

स्थान: जोहान्सबर्ग, दक्षिण अफ्रीका
तारीख: 22–23 नवम्बर 2025
थीम: सॉलिडैरिटी • इक्वैलिटी • सस्टेनेबिलिटी (एकजुटता • समानता • स्थिरता)
महत्त्व: पहली बार G20 सम्मेलन अफ्रीकी महाद्वीप में आयोजित हुआ।

2025 का G20 जोहांसबर्ग शिखर सम्मेलन, जो 22–23 नवंबर 2025 को जोहांसबर्ग एक्सपो सेंटर में आयोजित हुआ, G20 की 20वीं बैठक थी और अफ्रीकी महाद्वीप पर आयोजित होने वाला पहला G20 शिखर सम्मेलन भी।

दक्षिण अफ्रीका ने इस मंच का उपयोग अफ्रीका की विकास प्राथमिकताओं, वैश्विक समानता, तथा दक्षिण–दक्षिण सहयोग को उजागर करने के लिए किया।

हालाँकि इस शिखर सम्मेलन में कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के शीर्ष नेताओं की अनुपस्थिति चर्चा में रही — जिसमें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प शामिल थे — फिर भी नेताओं ने वैश्विक आर्थिक पुनर्प्राप्ति, जलवायु लचीलापन, और डिजिटल सहयोग जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया।

G20 का ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (Historical Background)

  • G20 की स्थापना 1999 में एशियाई वित्तीय संकट (Asian Financial Crisis) के बाद वैश्विक आर्थिक समन्वय के लिए प्रमुख विकसित और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को एक साथ लाने हेतु की गई थी।
  • शुरू में यह वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों का मंच था, लेकिन 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान यह विकसित होकर नेताओं के शिखर सम्मेलन (Leaders’ Summit) में बदल गया।

मुख्य बिंदु

  • 1999 में G7 के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों द्वारा भविष्य के वित्तीय संकटों को रोकने के उद्देश्य से G20 का गठन किया गया।
  • प्रारंभ में इसका कार्यक्षेत्र वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठकों तक सीमित था; बाद में 2008 में यह विश्व नेताओं के शिखर सम्मेलन तक विस्तारित हुआ।
  • वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान नेताओं की बैठक शुरू होने से G20 वैश्विक आर्थिक पुनर्प्राप्ति के केंद्र में आ गया।
  • G20 वैश्विक GDP का 85%, वैश्विक व्यापार का 75%, और विश्व की लगभग दो-तिहाई जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करता है—जिससे इसे अतुलनीय वैश्विक प्रभाव मिलता है।
  • इसकी सदस्यता में विकसित और उभरती दोनों तरह की अर्थव्यवस्थाएँ शामिल हैं, जिससे वैश्विक चुनौतियों पर व्यापक और समावेशी दृष्टिकोण सुनिश्चित होता है।
  • समय के साथ G20 का एजेंडा मौद्रिक और आर्थिक समन्वय से बढ़कर जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य सुरक्षा, डिजिटल परिवर्तन, आतंकवाद वित्तपोषण, और सतत विकास जैसे मुद्दों को भी शामिल करने लगा।
  • G20 ने Basel III सहित वैश्विक वित्तीय सुधारों, वित्तीय संस्थानों को सशक्त बनाने और वैश्विक नियामक सहयोग को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • इसने पेरिस समझौता, 2030 सतत विकास एजेंडा, और कमजोर देशों के लिए ऋण राहत (Debt Relief) पहलों जैसी वैश्विक प्रतिबद्धताओं का समर्थन किया।

1. सम्मेलन का मुख्य महत्त्व

  • ग्लोबल साउथ (Global South) के मुद्दों को केंद्र में रखा गया।
  • असमानता कम करना, जलवायु वित्त, ऊर्जा संक्रमण और विकास को प्राथमिकता दी गई।
  • अफ्रीका के विकास, ऋण बोझ और ऊर्जा संक्रमण पर विशेष ध्यान।
  • दक्षिण अफ्रीका की अध्यक्षता में (दिसम्बर 2024–नवम्बर 2025) सफल आयोजन।

2. वैश्विक पृष्ठभूमि

  • बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव।
  • अमेरिकी राष्ट्रपति का बहिष्कार (US no-show) → वैश्विक एकता पर प्रश्नचिह्न।
  • विकासशील देशों पर भारी ऋणबोझ और जलवायु संकट का दबाव।

3. प्रमुख एजेंडा बिंदु

  1. समावेशी वैश्विक वृद्धि और असमानता में कमी
  2. जलवायु कार्यवाही एवं ऊर्जा संक्रमण वित्त
  3. खाद्य सुरक्षा और कृषिलचीलापन
  4. वैश्विक शासन सुधार एवं बहुपक्षीय बैंक सुधार (MDB Reform)
  5. विकासशील देशों के लिए ऋण राहत (Debt Relief)
  6. सतत विकास, महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals)

4. मुख्य परिणाम (जोहान्सबर्ग लीडर्स डिक्लेरेशन)

  • 122-बिंदुओं वाला घोषणा पत्र सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया।
  • प्रमुख फोकस:
    • जलवायु वित्त बढ़ाना
    • ऊर्जा संक्रमण के लिए न्यायसंगत सहयोग (Just Energy Transition)
    • विकासशील देशों के लिए ऋण पुनर्गठन तंत्र
    • वित्तीय संस्थानों में ग्लोबल साउथ को अधिक प्रतिनिधित्व
  • Ubuntu (उबंटू) दर्शन — साझा मानवता — को मुख्य भावना के रूप में रखा गया।
  • बहुपक्षीय प्रणाली के प्रति नई प्रतिबद्धता दिखाई गई।

5. मुख्य देश/ब्लॉकपरीक्षा उन्मुख बिंदु

  • भारत: जलवायु न्याय, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, खाद्य सुरक्षा।
  • दक्षिण अफ्रीका: अफ्रीका-केंद्रित विकास, असमानता, ऊर्जा संक्रमण।
  • अमेरिका: राष्ट्रपति अनुपस्थित; कोई नया वादा नहीं।
  • यूरोपीय संघ: जलवायु कार्यवाही और स्थायी आपूर्ति श्रृंखला पर जोर।
  • चीन: ऋण राहत, वित्तीय सुधार, ग्लोबल साउथ सहयोग।
  • रूस: बहुध्रुवीय विश्व, वैकल्पिक भुगतान प्रणाली, ऊर्जा सुरक्षा।
  • अफ्रीकी संघ: विकास वित्त और ऋण राहत की मजबूत मांग।

6. महत्वपूर्ण शब्द (Exam Keywords)

  • Global South Agenda
  • Just Energy Transition
  • Ubuntu Philosophy
  • Debt Sustainability
  • Climate Finance Gap
  • MDB Reform (बहुपक्षीय विकास बैंक सुधार)

7. संभावित परीक्षा प्रश्न (UPSC/BPSC/State PCS)

  1. G20 2025 सम्मेलन ऐतिहासिक क्यों था?
    → पहली बार अफ्रीका में आयोजित; ग्लोबल साउथ को प्राथमिकता।
  2. मुख्य मुद्दे क्या थे?
    → असमानता, जलवायु वित्त, ऋण राहत, खाद्य सुरक्षा।
  3. US की अनुपस्थिति का क्या प्रभाव पड़ा?
    → वैश्विक एकता और घोषणा पत्र पर राजनीतिक दबाव बढ़ा।
  4. भारत की भूमिका क्या रही?
    → जलवायु न्याय, DPI मॉडल, खाद्य सुरक्षा समाधान पर नेतृत्व।

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