
India–China Border Dispute Notes for Civil Services Examination in Hindi for GS 1 & 2
भारत–चीन सीमा विवाद(India-China Border Dispute)
I. पृष्ठभूमि (BACKGROUND)
1. सीमा की लंबाई व भूगोल
- कुल लंबाई: लगभग 3,488 किमी (भारतीय आँकड़ा)
- तीन सेक्टर में विभाजित:
- पश्चिमी सेक्टर: लद्दाख (Aksai Chin)
- मध्य सेक्टर: हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड
- पूर्वी सेक्टर: अरुणाचल प्रदेश व सिक्किम
II. सीमा विवाद का उद्गम(ORIGIN)
1. औपनिवेशिक विरासत(Colonial Legacy)
- ब्रिटिश काल के नक्शों व समझौतों में असंगति
- पश्चिमी सेक्टर: कोई स्पष्ट सीमा नहीं तय
- पूर्वी सेक्टर: McMahon Line (1914) (Simla Convention)
2. चीनी दृष्टिकोण
- अरुणाचल प्रदेश को “South Tibet” बताता है
- Aksai Chin को Xinjiang–Tibet का हिस्सा मानता है
- McMahon Line अस्वीकार (क्योंकि तिब्बत को संधि का अधिकार नहीं था)
3. भारतीय दृष्टिकोण
- McMahon Line वैध व अंतरराष्ट्रीय रूप से मान्यता प्राप्त
- Aksai Chin ऐतिहासिक रूप से लद्दाख/जम्मू–कश्मीर का हिस्सा
III. सेक्टरअनुसार विवाद
(A) पश्चिमी सेक्टर– Aksai Chin
- क्षेत्रफल: ~38,000 वर्ग किमी
- चीन के कब्जे में 1950s से
- सामरिक महत्व: G219 हाईवे जो Xinjiang–Tibet जोड़ता है
(B) मध्य सेक्टर
- विवाद न्यूनतम
- अधिकांश सीमा पर समझौता संभव
(C) पूर्वी सेक्टर– अरुणाचलप्रदेश
- चीन 90,000 वर्ग किमी दावा करता है
- तवांग धार्मिक व सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण
IV. प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएँ
1. पंचशील समझौता(1954)
- “हिंदी–चीनी भाई–भाई” युग
2. चीन–भारत युद्ध(1962)
- मुख्य कारण:
- Forward Policy
- Aksai Chin विवाद
- परिणाम: चीन ने Aksai Chin पर कब्ज़ा बनाए रखा
3. बाद के तनाव
- 1967: नाथू ला और चो ला झड़प — भारत मजबूत स्थिति में रहा
- 1987: सुमदोरोंग चु — बातचीत से हल
V. विश्वास निर्माण उपाय(CBMs)-India-China border dispute
| वर्ष | समझौता |
| 1993 | LAC पर शांति व स्थिरता |
| 1996 | सैन्य CBMs (भारी हथियार निषेध) |
| 2005 | राजनीतिक मार्गदर्शक सिद्धांत |
| 2012 | WMCC (समन्वय तंत्र) |
| 2013 | BDCA (Border Defense Cooperation) |
| 2020 | Galwan के बाद सैन्य-राजनयिक संवाद |
VI. हालिया टकराव(21वींसदी)
1. देपसांग (2013)
- पश्चिमी सेक्टर, चीन की घुसपैठ
- वार्ता से समाधान
2. चुमार (2014)
- शी जिनपिंग की भारत यात्रा के दौरान तनाव
3. डोकलाम (2017)
- भारत–चीन–भूटान ट्राई-जंक्शन
- चीन सड़क बना रहा था
- भारत ने चिकन नेक (सिलीगुड़ी कॉरिडोर) की सुरक्षा हेतु हस्तक्षेप
- 73 दिन का गतिरोध
4. गलवान घाटी(2020)
- 45 वर्ष बाद पहली बार सैनिक हताहत
- 20 भारतीय सैनिक शहीद
- चीन ने बाद में हताहत स्वीकारे
- अनेक राउंड disengagement
5. पैंगोंग tso, हॉट स्प्रिंग्स, गोगरा
- कई स्थानों पर buffer zones बने
6. तवांग (2022, 2023)
- PLA की घुसपैठ का प्रयास, भारतीय सेना ने रोका
VII. सामरिक आयाम(STRATEGIC DIMENSIONS)
1. चीन की रणनीति
- Salami Slicing (धीरे-धीरे कब्ज़ा)
- सीमा पर सड़कें, एयरस्ट्रिप्स, गाँव
- पाकिस्तान के साथ तालमेल (CPEC PoK से गुजरता है)
2. भारत की रणनीति
- सैन्य आधुनिकीकरण
- DS-DBO रोड, Tunnels, Bridges
- रफाल, सुखोई, मिराज तैनाती
- QUAD, Indo-Pacific रणनीति
VIII. अनसुलझे मुद्दे of India-China Border dispute
1. LAC की अस्पष्टता
- वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) दोनों के लिए अलग-अलग
2. तिब्बत मुद्दा
- तिब्बत पहले buffer state
- 1950 के बाद संतुलन बदल गया
3. रणनीतिक अविश्वास
- CPEC PoK से
- UNSC/NSG में चीन का विरोध
- दो-सामने (Two-front) चुनौती
IX. भारत पर प्रभाव
(A) सुरक्षा प्रभाव
- चीन+पाकिस्तान से दो-फ्रंट खतरा
(B) आर्थिक प्रभाव
- व्यापारिक तनाव
- चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध (2020)
- तकनीकी निगरानी चिंताएँ
(C) राजनयिक प्रभाव
भारत के संबंध मजबूत हुए:
- USA, जापान, ऑस्ट्रेलिया (QUAD)
- फ्रांस
- ASEAN
- भूटान, नेपाल (मिश्रित)
X. समाधान का मार्ग(WAY FORWARD to India-China border Dispute
1. अल्प कालिक
- LAC की स्पष्टता
- अधिक सैन्य वार्ता तंत्र
- हॉटलाइन सिस्टम
2. मध्यम कालिक
- रक्षा आधुनिकीकरण
- ISR क्षमताएँ (ड्रोन, सैटेलाइट)
- सीमा अवसंरचना
3. दीर्घ कालिक
- संतुलित कूटनीति (Engagement + Deterrence)
- Indo-Pacific में साझेदारियाँ
- तिब्बत व सीमा कानून पर रणनीति
XI. निष्कर्ष (CONCLUSION)
भारत–चीन सीमा विवाद ऐतिहासिक, भू-राजनीतिक और सामरिक कारकों से संचालित है। सीमा का समाधान अभी दूर है, परंतु LAC पर शांति व स्थिरता क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास और एशियाई शक्ति संतुलन के लिए अत्यंत आवश्यक है। संवाद, प्रतिरोध व रणनीतिक साझेदारी का संतुलित दृष्टिकोण भारत के लिए सबसे व्यवहारिक राह है।
